Sat. Oct 19th, 2019

मध्य प्रदेश: पंचायत भवन के पास शौच करने पर दो दलित बच्चों की पीट-पीटकर हत्या

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शिवपुरी: मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के भावखेड़ी गांव में बुधवार को पंचायत भवन के पास शौच करने के आरोप में दो दलित बच्चों को दो लोगों ने कथित तौर पर पीट-पीटकर मार डाला.

सिरसौद पुलिस थाने के प्रभारी निरीक्षक आरएस धाकड़ ने बताया कि यह घटना सुबह भावखेड़ी गांव में हुई.

उन्होंने बताया कि दोनों बच्चों रोशनी (12) और अविनाश (10) को गंभीर चोटें आईं और उन्हें तुरंत जिला अस्पताल ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया.

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, मामले के आरोपी हाकिम यादव और रामेश्वर यादव भावखेड़ी गांव के ही रहने वाले हैं. दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया है.

रिपोर्ट में पुलिस के हवाले से बताया गया है कि दोनों नाबालिगों पर हमला करने से पहले आरोपियों ने अपने मोबाइल फोन से उनकी तस्वीरें भी ली थीं. रिपोर्ट के अनुसार, एक आरोपी ने पुलिस को बताया कि उसने दोनों बच्चों को इसलिए मारा क्योंकि ईश्वर ने उसे दुष्टों को मारने का आदेश दिया था.

सिरसोद थाने के पुलिस निरीक्षक आरएस धाकड़ ने कहा, ‘पीड़ित बच्चे बुधवार सुबह पंचायत भवन के पास खुले में शौच कर रहे थे, जब दोनों आरोपियों- हाकिम यादव और रामेश्वर यादव ने उन्हें ऐसा करने से रोका. उसके बाद दोनों बच्चों को बर्बरतापूर्वक लाठियों से पीटा, जिसकी वजह से उनकी मौत हो गई.’

शिवपुरी एसपी ने हिंदुस्तान टाइम्स से बातचीत में कहा, ‘आईपीसी की धारा 302 और एससी/एसटी एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज कर लिया गया है. दोनों आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है. पुलिस मामले की जांच कर रही है. यह जानने की कोशिश भी की जा रही है कि हत्या अंधविश्वास या फिर अस्पृश्यता की वजह से तो नहीं हुई.’

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, घटना के बाद गांव में तनाव है. इसे देखते हुए बड़ी तादाद में पुलिस बल को तैनात किया गया है.

मृतक बच्चों के परिजनों का आरोप है कि परिवार से रंजिश की वजह से हाकिम यादव और रामेश्वर यादव ने हत्याकांड को अंजाम दिया. मृतक अविनाश के पिता का कहना है कि मां की मौत के बाद उसने बहन रोशनी को बेटी की तरह पाला था. मृतक अविनाश और रोशनी बुआ-भतीजे थे.

पीड़ित परिवार का कहना है कि आरोपियों के घर का ही एक सदस्य सरपंच है और रंजिश की वजह से उन्हें अब तक सरकारी सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पाया. पीड़ित पक्ष का आरोप है कि सरपंच ने घर में सरकारी योजना के तहत फ्री शौचालय भी नहीं बनने दिया. इस वजह से मजबूरन शौच के लिए बाहर निकलना पड़ता है.

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