Sat. Oct 19th, 2019

अमेरिका में भारतीय-अमेरिकी संगठनों ने मोदी और ट्रंप के विरोध में किया प्रदर्शन

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अमेरिका के ह्यूस्टन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यक्रम के दौरान लोगों ने प्रदर्शन कर कश्मीर में जारी पाबंदी, मॉब लिंचिंग और एनआरसी जैसे मुद्दों को उठाया.नई दिल्ली: अमेरिका के ह्यूस्टन में जहां एक तरफ हजारों लोगों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए जश्न मनाया, वहीं कुछ समूहों ने कार्यक्रम स्थल पर इकट्ठा होकर भारत में भीड़ हिंसा, हिंदुत्व और कश्मीर में लगातार जारी पाबंदी का विरोध किया.

भारतीय अमेरिकियों के एक समूह अलायंस फॉर जस्टिस एंड एकाउंटेबिलिटी (एजेए) ने मोदी सरकार और भाजपा के अलोकतांत्रिक, जनविरोधी और अल्पसंख्यक विरोधी एजेंडा का विरोध किया.

समूह की ओर से कहा गया, ‘इस समूह (एजेए) में सभी धर्मों के भारतीय-अमेरिकी समुदाय के लोग शामिल थे. इसमें हिंदुज फॉर ह्यूमन राइट्स (एचएचआर), द इंडियन अमेरिकन मुस्लिम काउंसिल और द ऑर्गनाइजेशन फॉर माइनॉरिटीज ऑफ इंडिया जैसे संगठन शामिल हुए. इस समूह का किसी भी अन्य देश या अलगाववादी समूहों से कोई संबंध नहीं था.’विरोध प्रदर्शन में शामिल लोगों ने भारत में मॉब लिंचिंग की बढ़ती घटनाओं, जम्मू कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 की अधिकतर धाराओं को खत्म करने, असम में लाए गए राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी), गैर-न्यायिक हत्या, धार्मिक अत्याचार और जातीय उत्पीड़न जैसे मुद्दों को सामने रखा.

एक तख्ती में आईपीएस अधिकारी और व्हिसिल ब्लोअर संजीव भट्ट को दोषी ठहराए जाने का मुद्दा उठाया जबकि फिल्म अपोलो-13 से प्रेरणा लेते हुए तख्ती पर लिखा था, ‘ह्यूस्टन हमें एक समस्या है और वह समस्या मोदी हैं.’

द वायर से बात करते हुए एचएचआर की सह संस्थापक सुनीता विश्वनाथ ने कहा कि दुनिया के दो कट्टर और दमनकारी नेताओं के खिलाफ प्रदर्शन के लिए इतने अलग-अलग समुदाय और संगठनों के समूह को इकट्ठा करना बेहद ही संतुष्टि के लायक काम है.विश्वनाथन ने कहा कि अपने भाषण के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने भारत में विकास की गलत तस्वीर पेश करने की कोशिश की.

उन्होंने कहा, ‘हम जानते हैं कि कश्मीर में घेराबंदी करने के साथ संचार माध्यमों पर पाबंदी लगाई गई है. मुसलमानों और दलितों की नियमित मॉब लिंचिंग हो रही है और एनआरसी लागू करके मुसलमानों की नागरिकता छीनने के लिए उन्हें निशाना बनाया जा रहा है और उन्हें हिरासत शिविरों में रखा जा रहा है.’

उन्होंने कहा, ‘यह रैली ट्रंप और मोदी के वैचारिक गठबंधन को दिखाता है. दोनों ने बड़े ही अजीबोगरीब और गर्मजोशी से मंच साझा किया. मोदी ने ट्रंप के दोबारा चुनाव जीतने का भी समर्थन किया.’

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